anand shrivas


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मेरे जीवन की धारा

मेरे जीवन की धारा बहती चली गई
कभी मंद मंद तो कभी तेज बहाव मे
बहती गई बहती गई
जीवन के कण कण मे जीने का एहसास है
सुख ओर दुख मे जीवन के जसवात है
मेरे जीवन की धारा बहती चली गई

आंखो को नम कर गई वो यादें
अकेला मन जब रोया था

[Hata Bildir]