Madhuraj Kumar

Rookie - 16 Points (13 March 1997 / Bagaha, Bihar)

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आत्म ध्वनि

किसी रोज अपने गौरव की छत पर
मै बैठा था खुद को यूँ आवाज देकर,
आ रही अंतरात्मा से ये आवाज है
तेरे अभिमान का ये कैसा परवाज़ है,
उत्थान के मद मेँ तू खोया कहाँ है
बुला रही धरा पुकारता आसमाँ है,
मँजिल की बुलँदियोँ का तू अवश्य प्यारा है
पर ग़र्त की परछाईँयोँ का तू ही सहारा है,
तुझपे छाया ये अँधकार कैसा घना है

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