Madhuraj Kumar

Rookie - 320 Points (Bagaha, Bihar)

Comments about Madhuraj Kumar

There is no comment submitted by members..

तुम्हें ही...

तुम्हें ही
दूर आसमाँ के साये में इक चेहरा उभरते देखा है
हवा की थिरकन में इक जादू तिरते देखा है
फूलों में कलियों में किसी को महकते देखा है
सूर्य की अग्नि बन कर किसी को दहकते देखा है
आसमाँ में चाँद को किसी से शर्माते देखा है
इन काली घटाओ में उन जुल्फो को लहराते
देखा है
इन जल लहरों के अंतर में इक मस्ती उमड़ते

[Report Error]