Madhuraj Kumar

Rookie - 29 Points (13 March 1997 / Bagaha, Bihar)

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तुम्हें ही...

तुम्हें ही
दूर आसमाँ के साये में इक चेहरा उभरते देखा है
हवा की थिरकन में इक जादू तिरते देखा है
फूलों में कलियों में किसी को महकते देखा है
सूर्य की अग्नि बन कर किसी को दहकते देखा है
आसमाँ में चाँद को किसी से शर्माते देखा है
इन काली घटाओ में उन जुल्फो को लहराते
देखा है
इन जल लहरों के अंतर में इक मस्ती उमड़ते

[Hata Bildir]