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(03 September,1988 / Sonepur, Saran, Bihar, India)

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हम तो इंतजार करते रहें

हम तो इंतजार करते रहें
वक्त आकर गुजरती रही
मैं ठहरा 'साहिल'
लहरें आती रही
और जाती रही
कभी कभी छू कर
उछलती और कूदती रही
और मैं देखता ही रहा
क्या सुनाये अपनी दास्ताँ
सजा पाई मैंने
कभी कुछ बोलकर
कभी चुप रहकर
जिसकी हाथों में
गया था फुल देकर
देखता हूँ आज आकर
उसकी हाथों में पत्थर
फूलों की जगह
कांटें आते हैं नजर
वक्त बदल रहे हैं
हम तो इंतजार करते रहें
वक्त आकर गुजरती रही
शशिकांत निशांत शर्मा 'साहिल'

Submitted: Thursday, March 21, 2013


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