Shashikant Nishant Sharma

Rookie (03 September,1988 / Sonepur, Saran, Bihar, India)

सैनिक की अलिलाषा - Poem by Shashikant Nishant Sharma

मै सैनिक देश का
मुझे डर नही मौत का
फिर भी अभी कह देता हूँ दोस्तो
मै मर जाऊ
हो जाऊ शहीद
दोस्त रखना इतना याद
मेरी खबर मेरे घर पहुँचाना
संकेतों बतलाना
मेरी बहन को उसकी राखी
लौटा देना
अगर करे वह रूदन
इतना रखना ध्यान
भ्रार्तत्व का स्नेह लुटा देना
मेरी माँ के पास जो जाना
इतना जरूर करना
रण भुमी का मिटटी
आदर पुर्वक चरणो पर रख देना
अगर रूदन करे तो
भारत माँ की याद दिला देना
वही थोड़ी दूर
होगी मेरी पतनी
उसको उसकी चिढटी लौटा देना
वह तो चुप वही होगी
पर कोशिश करना
इतना कह देना
नही मरा है हुआ है शहीद
आखरी पल कर रहा था तुम्हे याद
एक-दो आसू टपका देमा
संकेंतों में बतला देना
शशिकांत निशांत शर्मा 'साहिल'


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Poem Submitted: Saturday, March 30, 2013



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