Yashvardhan Goel


मदहोश हैं तेरी बातों में बेहोश हम नहीं - Poem by Yashvardhan Goel

वक़्त थम सा गया साँसों से बेचैनी चुराकर.,
तेरी आँखों में खोकर जिंदगी को होश अब नहीं

करतें हैं कोशिश गुजर जाने की लम्हे,
मदहोश हैं तेरी बातों में बेहोश हम नहीं!


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Poem Submitted: Monday, October 28, 2013

Poem Edited: Tuesday, October 29, 2013


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