ajay srivastava

Rookie - 151 Points (28/08/1964 / new delhi)

पृथ्वी माँ - Poem by ajay srivastava

तुम बहुत खूबसूरत हो
जो देखता है एक टक देखता ही रहता है11
बर्फ से आछ दित पहाड़
मन को कलाकारी करने को प्रेरित करते हैं11
तुम्हारे तल मैं समायी
पानी की अनन्तता जीवन का एक प्रतीक है
असीमित सम्पदा तुम्हारी महानता m का प्रतीक हैं11
तुम्हारी रेखा एक दूसरे के लिए सम्मान देने का एक प्रतीक है11
सब लोग प्यार करते पृथ्वी माँ से
पृथ्वी माँ तुझे शत बार नमन11


Comments about पृथ्वी माँ by ajay srivastava

There is no comment submitted by members..



Read this poem in other languages

This poem has not been translated into any other language yet.

I would like to translate this poem »

word flags

What do you think this poem is about?



Poem Submitted: Thursday, December 6, 2012



[Hata Bildir]