Upendra Singh

Rookie - 30 Points (03-06-1972 / Azamgarh)

Aaz Aayenge Balam Mora Gaon Re - Poem by Upendra Singh

आज़ आयेंगे बलम मोरा गाँव रे|


आज़ आयेंगे बलम मोरा गाँव रे|
कागा आँगन में बोले काँव-काँव रे|

आज़ मोरा मधुबन में कुहके कोयलिया|
छम-छम छमक उठी पाँव की पायलिया|
बलखाती इठलाती खुशी ठाँव-ठाँव रे|


धरती का रूप देख अम्बर इठलाये|
लहर-लहर नदिया का पानी लहराये|
लहरों पे मचल उठी माँझी की नाव रे|

शर्मीली कलियों ने घूँघट उठाया है|
सोख हसीं फूलों ने गुलशन सजाया है|
आज़ ठुमक-ठुमक नाचे मन के मधुर भाव रे|

आज़ मधुमास मधुर सज-धज के आया है|
मस्त बहारों ने क्या रंग जमाया है|
मोरा मन मृदंग बाजे, , , , , , , , , , , , , , , , , ...

आज़ मगन कितनी मैं कैसे मैं बताऊँ रे|
पिया की दीवानी मैं पिया-पिया गाऊं रे|
पड़े नहीं सखी मोरा धरती पे पाँव रे|

उपेन्द्र सिंह ‘सुमन'


Comments about Aaz Aayenge Balam Mora Gaon Re by Upendra Singh

There is no comment submitted by members..



Read this poem in other languages

This poem has not been translated into any other language yet.

I would like to translate this poem »

word flags

What do you think this poem is about?



Poem Submitted: Thursday, August 7, 2014



[Hata Bildir]