Vivek Tiwari

Rookie - 98 Points (23 July 1985 / Gaura (R.S.) Pratapgarh)

Prem (प्रेम) - Poem by Vivek Tiwari

प्रेम ही रब है प्रेम है पूजा
प्रेम समान नही कोई दूजा
प्रेम का कर ले हर कोई पान
प्रेम जगत में सबसे महान!

दिल की धड़कन प्रेम की बोली
मिलन ह्रदय का प्रेम की डोली
प्रेम ही जीवन प्रेम जहान
प्रेम का कर ले हर कोई पान!

प्रेम जगत का रूप अनोखा
प्रेम ही जीवन की हर रेखा
प्रेम कहानी प्रेम ही वक्ता
प्रेम कथा का प्रेम ही श्रोता
प्रेम से हट के कही न जा
प्रेम ही रब है प्रेम है पूजा
प्रेम का कर ले हर कोई पान
प्रेम जगत में सबसे महान!

प्रेम है जीवन की हरियाली
प्रेम है जीवन की फुलवारी
प्रेम स्वरुप है प्रेम का गहना
प्रेम का कर ले हर श्रृंगार
प्रेम जगत में सबसे महान!

प्रेम हंसी है प्रेम है रोना
प्रेम में खोना प्रेम का पाना
जो प्रेम में खोया सब कुछ पाया
गम को जीत के खुशियां पाया
यही प्रेम की है पहचान
प्रेम जगत में सबसे महान! !
विवेक तिवारी


Poet's Notes about The Poem

प्रेम ही रब है प्रेम है पूजा (Love is god love is worship)
प्रेम समान नही कोई दूजा (Love is matchless, love is unique)
प्रेम का कर ले हर कोई पान (Let us drink the cheers of love)
प्रेम जगत में सबसे महान! (Love is the greatest in whole universe)

दिल की धड़कन प्रेम की बोली (Beats of heart are its rhyme)
मिलन ह्रदय का प्रेम की डोली (The union of love is its palanquin)
प्रेम ही जीवन प्रेम जहान (Love is life love is the world)
प्रेम का कर ले हर कोई पान! (Let us drink the cheers of love)

प्रेम जगत का रूप अनोखा (The feature of Love-world is so strange)
प्रेम ही जीवन की हर रेखा (Its every fate line of hands)
प्रेम कहानी प्रेम ही वक्ता (Love is the tale, itself the teller)
प्रेम कथा का प्रेम ही श्रोता (Love itself is the listener of tale)
प्रेम से हट के कही न जा (Leave not love`s pleasant company)
प्रेम ही रब है प्रेम है पूजा (Love is God love is worship)
प्रेम का कर ले हर कोई पान (Let us drink the cheers of love)
प्रेम जगत में सबसे महान! (Love is the greatest in whole universe)

प्रेम है जीवन की हरियाली (love is beautiest greenery of life)
प्रेम है जीवन की फुलवारी (Love is the colourful gardening of life)
प्रेम स्वरुप है प्रेम का गहना (Love itself is the jewelry of Love)
प्रेम का कर ले हर श्रृंगार (Let us all wear the jewel of love)
प्रेम जगत में सबसे महान! (Love is the greatest in whole universe)

प्रेम हंसी है प्रेम है रोना (Love is the pleasure, love is the pain)
प्रेम में खोना प्रेम का पाना (To be lost in love is love`s precious gain)
जो प्रेम में खोया सब कुछ पाया (Who lost in love had all things gotten)
गम को जीत के खुशियां पाया (Overcoming the grief got pleasure unbroken)
यही प्रेम की है पहचान (This is the quite recognition of love)
प्रेम जगत में सबसे महान! (Love is the greatest in whole universe)

Comments about Prem (प्रेम) by Vivek Tiwari

  • Freshman - 824 Points V P Mahur (3/2/2014 11:40:00 AM)

    Dear Sir
    Your music and flow is nice
    in fact this whole world runs on one or other forms of love
    This is the blessing of goddess Sarswati.
    Thanks for a sweet read (Report) Reply

    1 person liked.
    0 person did not like.
  • Rookie - 30 Points Shraddha The Poetess (3/1/2014 10:49:00 PM)

    veryyyyyyyy beautiful description of love..............
    lve is something which is pure..like a mother's love to her child... (Report) Reply

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Poem Submitted: Friday, February 28, 2014

Poem Edited: Friday, March 7, 2014


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