Abhaya Sharma


Abhaya Sharma Poems

Best Poem of Abhaya Sharma

Maa to aakhir maa hoti hai - माँ तो आखिर माँ होती है

माँ तो आखिर माँ होती है
मेरी या तेरी या फिर किसी और की
कैसे माँ से भिन्न भला माँ हो सकती है
सोलह आने सच है - माँ तो आखिर माँ होती है

जन्म-काल से पहले के उन नौ मासों में
बंधन माँ से जुडे हमारे कई बरसों के
काटे नही कटते, नही टूटते किसी तरह से
कहता है दिल - माँ तो आखिर माँ होती है

माँ, तुम राजाओं की माँ
तुम पीर-फ़कीरों की भी माँ
कैसे चलता जग बिन माँ के
कुछ झूठ नही कि - माँ तो आखिर माँ होती है

माँ, आज तुम्हारे जाने की बेला आई
मन विह्वल है, भावुक है मेरा विचलित है
कल किसे कहूंगा जाकर माँ सपने अपने
यह मान लिया कि - माँ तो आखिर माँ होती ...

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Naye Stambh - नये स्तंभ

एक एक कर चूर हो गये
थे जितने भी स्तंभ पुराने
नये जगत के नये थे किस्से
नये थे अब नभ में भी तारे ।

तारों की जब बात चली है
सूरज भी एक तारा है
हिला नही करता कहते है
क्या जगह एक है टिका खड़ा ।

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