Abhaya Sharma


Naye Stambh - नये स्तंभ

एक एक कर चूर हो गये
थे जितने भी स्तंभ पुराने
नये जगत के नये थे किस्से
नये थे अब नभ में भी तारे ।

तारों की जब बात चली है
सूरज भी एक तारा है
हिला नही करता कहते है
क्या जगह एक है टिका खड़ा ।

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