Abhishek Omprakash Mishra

Freshman - 722 Points [Kavi Abhishek Omprakash Mishra] (19 Sept / Orai)

Abhishek Omprakash Mishra Poems

1. Ishq Ka Dard 1/17/2014
2. Unki Yad 1/17/2014
3. Aye Dil Use Kabhi To Bhool Jaya Kar 1/20/2014
4. Ek Mulaqat 12/15/2013
5. जो दिन बचपन के गुजर गये, वो दिन भी कितने अच्छे थे. 11/7/2014
6. Jo Din Bachpan Ke Guzar Gaye, Wo Din Bhi Kitne Acche The. 11/7/2014
7. लाखों होश गवांते होंगे, लाखो ही इतराते होंगे 11/12/2014
8. सनम मेरा चुनिंदा है चलो अब लौट आओ तुम 11/16/2014
9. मुश्किल है ज़माने में किसी के प्यार को पाना 11/16/2014
10. हमारे गीत सुन करके दिल उसका झूम जाता था 11/16/2014
11. किसी के दिल की ख़ामोशी जहाँ पर राज करती हो 12/4/2014
12. किसी के दिल की ख़ामोशी जहाँ पर राज करती हो 12/4/2014
13. समूचा विश्व ''मोदी मय'' हुआ है, उसकी आहट सुन 12/6/2014
14. Chalo Hum Kho Jate Hai, Kisi Ke Ho Jate Hai....! ! ! 7/30/2014
15. Chalo Hum Kho Jate Hai, Kisi Ke Ho Jate Hai.... 7/30/2014
16. बता ऐ रब मेरी उस माँ का अब, कैसे गुज़ारा होगा 12/19/2014
17. बता ऐ रब मेरी उस माँ का अब, कैसे गुज़ारा होगा 12/19/2014
18. हमारे प्रेम कि बिसरी कहानी, याद आती है. 12/19/2014
19. न जाने क्यों मेरे दिल को तुम्हारा नाम भाता है. 12/19/2014
20. जिसका दिन तुम्हारी याद में सदियों सा बीता हो. 12/19/2014
21. यहाँ मेहमान तुम भी हो, यहाँ मेहमान हम भी है 12/19/2014
22. यहाँ हर सुख का साथी है यहाँ हर दुःख कंवारा है 12/19/2014
23. तुम्हारे इश्क में जीवन कहाँ, कैसे, गुज़ारा है. 12/19/2014
24. जो गुजरे इश्क में सावन सुहाने, याद आते हैं 8/11/2015
25. मुझे अब तक, तेरे झूठे बहाने याद आते हैं 8/11/2015
26. मैं जितना सब्र करता हूँ, तू उतना आजमाती है 8/11/2015
27. एक शहंशा मैं तेरे दिल का, एक हुस्न की रानी तू 8/11/2015
28. जो अब तक मैं नहीं बोला, मेरे अल्फाज़ बोलेंगे 8/11/2015
29. बुने किस्मत ने जो जाले, उन्हीं जालों में उलझा हूँ 8/11/2015
30. कि पत्थर भी हमारी कब्र से, अब नम निकलते हैं 8/11/2015
31. मौजों से जो लङता हूँ, किनारे रूठ जाते हैं 8/11/2015
32. कहूँ मुमताज़ या कोई अजन्ता की तुम मूरत हो 8/11/2015
33. किसी के मुस्कुराने से, कोई क्यों रूठ जाता है 8/11/2015
34. मिटा कर हाथ कीं रेखा, मेरी तकदीर बन जाओ 8/11/2015
35. मेरे होठों और हाथों में, ये सुर और साज तुम्हारा है 8/11/2015
36. मुसाफ़िर हूँ तेरे दर पर मैं इक फरियाद लाया हूँ 8/11/2015
37. मेरी खामोशियाँ भी, अब किसी का जिक्र करतीं हैं 8/11/2015
38. न जाने क्यों हवाओं में उसी का अक्स बहता है 8/11/2015
39. इक लम्बे सफर के बाद कभी, सूरज जैसे ढल जाता है 8/11/2015
40. किसी की याद में छलका, आंखों का मैं पानी हूँ 8/11/2015
Best Poem of Abhishek Omprakash Mishra

Dard Tumhara Aur Zism Hamara! ! !

Tumhare jane ke Baad Baaki Aur To Sab Theek Hai Lekin...ღ
Jahan' DIL' Tha Kabhi Pehle, Wahan Ab Dard Rehta Hai...ღ

Read the full of Dard Tumhara Aur Zism Hamara! ! !

Unki Yad

In Aankho'n Ne Raat Jab Ek Chand Mukamal Dekha...
Phir Samandar Ko Bhi Humne Hote huye Pagal Dekha..

Raat Bhar Dair Tak Karte The Teri Baatei'n Hum Khud Se...
Aur Raat Bhar Samne Tera Chehra Humne Pal-Pal Dekha...

Aaj Yaado'n ki Ghtaa Toot Ke Barsi Humare Dil Pe...
Aaj Hum Ne Bhi Barasta Hua Badal Dekha...

[Report Error]