Akhilesh Bakshi

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उस हसीन की दास्तान

सिलसिलेवार काफिले चलते रहे,
उस हसीन चेहरे को हम निहारते रहे!

नायाब्पोशी में उसकी ये जहान लगा रहा,
और हम जहान को निहारते रहे!

पल दो पल का साथ था इस रूबरू में,
ख़्वाब सदियों के हम बनाते रहे!

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