Anchal Dhanush Verma


मैं हूँ, तुम हो, हम हैं।

कभी हूँ हँसता कभी हँ रोता कभी बादलों में छिप जाता हूँ, कभी फ़रियादों में बुन कर याचक की आवाजें बन जाता हूँ, कभी रौशनी को पलकों पर सजाए आँखों से उजियारे कर देता हूँ, कभी रस्तों पर चलकर आसमान में उड़ने की इच्छा कर लेता हूँ। मैं हूँ, तुम हो, हम हैं। तू है तो मुस्कुराती हैं कोयल, कुक्कू और कलियाँ, तू है तो रंगा है इंद्राधनुष और रंगी हैं तितलिया

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