Dr. Navin Kumar Upadhyay

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Best Poem of Dr. Navin Kumar Upadhyay

साथ रहते सदा, आसमाँ वे तकते रहते हैं।

साथ रहते सदा, आसमाँ वे तकते रहते हैं।
जाने क्या सोच-सोच, वे मुस्कुराते रहते हैं।।
ख्याल में क्या रहते, उनके जुदा मन सदा,
इसीलिए उनकी आँखें, ऊपर ओर लखते हैं।
कभी-कभी नींद भी लेती, उनको आगोश में,
तब भी उनके अरुण-अधर, करतब करते रहते हैं।
अधराधर रहते बँद, उमड़ता रहता सदा तूफान,
लेकिन जब कुछ बोल पड़ते, प्यार उमड़ पड़ते हैं।
नयनों को हेरो मेरी ओर, कह दो बस इक इशारे से,
'नवीन'तेरे अधर-मिलन हेतु, हम तड़पते रहते हैं।

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राधे राधे नाम रटत श्याम

राधे राधे नाम रटत श्याम,
प्यारी जू सखि बदन छिप्यो है।
इत-उत हेरत, लखत न.जब कहीं,
. सुभग सुन्दर तन श्रमित भयो.है।।
आई लेट्यो, कछु न दीखत.कहुँ,
इक.गोपी, तब करकँज गह्यो.है।
'नवीन'करतल कर पकड़ि ले जा,
.........राधा मुख दरशाई.दियो.है।
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