Ganesh Prasad Timilsena

Freshman - 526 Points [Sursen Gaunle Anyol] (Pokhara, Nepal)

Ganesh Prasad Timilsena Poems

1. Now 6/10/2015
2. रिस्ते 6/11/2015
3. तकदिर 6/11/2015
4. ढङ्ग 6/11/2015
5. आएँ 6/14/2015
6. देश 6/14/2015
7. के'था! 6/14/2015
8. तुम्हे 6/15/2015
9. मैं ने 6/15/2015
10. गोरु र गोरु हरु 6/15/2015
11. याद हरु 6/15/2015
12. चिहान घारी तिर 9/9/2016
13. शुभकामना! ! ! 10/2/2016
14. हम 10/4/2016
15. ञहीँ 12/3/2016
16. ढुङ्गा 12/15/2016
17. पटमूर्ख 8/25/2017
18. जडाउरी 8/25/2017
19. मैं भी 8/26/2017
20. आशा 8/27/2017
21. विवसता 8/28/2017
22. रे ।। 9/12/2017
23. सम्बन्ध हरु 9/19/2017
24. बन्धकी 9/21/2017

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Best Poem of Ganesh Prasad Timilsena

रिस्ते

कसम तो हम ने खायी थी
साथ चलना आप के साथ
कस्मे ना टूटे हम से कभी
दिल पे बसी थी इतनी सी बात ।।
खुद सम्हालकर काँटों को
आप को चाहा मिले फूल
जगा दी थी दिलों में हम ने
आप की तक़दीर गले पे अटक गई ।।
वादें हम तोड़ते तोः सायद
ज़िंदगी भर पछताते हम
आप ने ही रास्ता मूड़लिया
तक़दीर जो हमारे साथ था ।।
.....
(sg anyol) (04/06/2015)

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तकदिर

दिल में चाहत होने से क्या
चल्ना तो तकदिर के साथ् पड्ता है
दौलत सौरत जाबानी क्या
जल्ना तोः लकडी के साथ् पड्ता है
हर कदम पे मर्जी इन्सान कि चल्ती नही
फिर भी हर बार मेरा कहेना पड्ता है
फूल सी है जिन्दगि रंग भरना है जग में
फिर भी इन्सान हर कदम पे कांटे बो ता है

(sg anyol) (27/7/2014)

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