Himanshu Dubey

Rookie - 62 Points [Poet] (Sagar)

Sukoon Ki Talash

जब मैं भटकता था 'सुकून की तलाश' में.. एक अजनबी चेहरा था तारों के लिबास में.. बेकरारी एहसास में, तड़प थी हर सांस में. जब मैं भटकता था 'सुकून की तलाश' में.. 1-मचलती उमंग, उम्मीदों के कुछ नये रंग थे पास में.. लगने लगा था यूँ के हूँ कुछ खास मैं. ख्वाबों की तरंग बल खाती थी पास में. जिंदगी थी एक नशा और था बदहवास मैं.. हैं ये उस हसीन सफ़र की दास्तां.. जब

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