Jaideep Joshi


अमरगान

माना जीवन क्षणभंगुर है, (पर) सबमें अमरत्व का अंकुर है।

कहते हैं जिन्हें हम अमर यहाँ, है देह तो उनकी पंचभूत;
उनकी कर्म-कस्तूरी की महक से किन्तु, है हर मानस-चित्त अभिभूत।
गौरव का उनके अमरगान, करता सृष्टि का हर सुर है;

माना जीवन क्षणभंगुर है, सबमें अमरत्व का अंकुर है।

विघ्नों की चुनौती आयुपर्यन्त, आशाओं की संभावनाएं अनन्त।

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