KV. KUNAL

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Gujarish

जो मेरी जिन्दगी की शाम है, मेरी आशिक़ी जिसकी पहचान हैं। मृगनी जैसी नैनो वाली, ओ एक हसीना गुमनाम हैं ।
गंगा जैसी पवन है जो, रिमझिम बर्षा का सावन है जो । आती है वो बहार लेकर, मुस्कुराती है ओठों पर प्यार लेकर । बलखा के आना…थोड़ा शरमा, धीरे धीरे

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