NADIR HASNAIN


नशा इश्क़ का चढ़ जब जाए

नशा इश्क़ का चढ़ जब जाए
दुनियाँ में फिर कुछ ना भाए
हर कोई महबूब ही दीखता
उसके सिवा कुछ नज़र ना आए
नशा इश्क़ का चढ़ जब जाए

इश्क़ की ख़ातिर जीना मरना
दुनियाँ वालों से क्या डरना
दिलबर की बातों से प्यारी

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