Aftab Alam

Gold Star - 39,838 Points (15 th April 1967 / RANCHI,)

वही तो इंसान है - Poem by Aftab Alam

जिस दिल में प्यार नही, वो चलता फिरता जहन्न मे जहान है,
जो बचा लिया खुद को इस आग से, वही तो इंसान है ॥

वो लोग जो किसी भी तरह से आकांक्षाओ को पूरा करते हैं,
वो तन्हाई में ना जाने क्यों खुद के साये से भी डरते हैं!

इंसानियत के क़त्ल का हम सब, साहिबे गवाह हैं, क्या बात है!
अपने हाथों ही बर्बाद ए तबाही लिखी हमने, क्या जजबात है!

हैरत तो इस बात की है, हम क्यों हैरत-अंगेज नहीं हैं!
क़तिलो को आक़ा मानने पर भी हमें क्यों गुरेज नही है!

Topic(s) of this poem: humanity


Comments about वही तो इंसान है by Aftab Alam

There is no comment submitted by members..



Read this poem in other languages

This poem has not been translated into any other language yet.

I would like to translate this poem »

word flags


Poem Submitted: Sunday, March 8, 2015



[Report Error]