Aftab Alam

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ईश्क़ और सच्चाई - Poem by Aftab Alam

ईश्क़ की राहों में चलना इतना आसाँ नहीं,
यहाँ फूल भी हैं लजवाब, कांटे भी हैं बेसुमार,
सच्चाई की राहों में चलना इतना आसाँ नहीं,
यहाँ फूल भी हैं लजवाब, कांटे भी हैं बेसुमार,

ईश्क़ की लम्बी राह संग सच्चाई चलती है,
जीत तो वाजिब है लेकिन करना पड़ेगा इंतज़ार,
थक गये जो हार कर राह में हो जाओगे ढेर,
कांटे की सवारी ले निकल जनिब-ए-मंज़िल हो सवार,

Topic(s) of this poem: poems


Comments about ईश्क़ और सच्चाई by Aftab Alam

  • Kavita Singh (9/8/2016 4:23:00 AM)


    ye ishq nahi aasan..... nice (Report) Reply

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Poem Submitted: Monday, March 9, 2015



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