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Aadat/आदत

वो आदत ही तो हैं
जो बस करने ना दे कुछ।।

आंख खुली, नज़र उठी
तो मन कहा याद कार्लो जी।।

बस याद कर लो जी
कहते कहते बाकी सब कर दे खाली।।

यूं तो है नहीं बहुत कुछ

पर फिर भी जो है वो कायल है तेरी।।
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Friday, December 25, 2020
Topic(s) of this poem: anger
POET'S NOTES ABOUT THE POEM
Anger and quietness always go together they are two sides of the same coin
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Annabel Lee