जीवन के उपवन में तू फूलों सी
तेरी पंखुड़ियों से लिपटा सुगंध हूँ मैं
तेरा आनंद हूँ मैं..
तू साहित्य सी सरल, निर्मल पवित्र है
शब्द, रस, भाव, अलंकार, छन्द हूँ मैं
तेरा आनंद हूँ मैं..
तू पूरी धरती, पूरी दुनिया सी है
तेरी दुनिया का अकेला चाँद हूँ मैं
तेरा आनंद हूँ मैं..
तू प्रेम की विशाल गहरा सागर है
तेरे एक एक बून्द का एहसानमंद हूँ मैं
तेरा आनंद हूँ मैं..
तू शब्दों की विशाल शब्दकोश सी
उन शब्दों से हीं दौलतमंद हूँ मैं
तेरा आनंद हूँ मैं..
|| आनन्द प्रभात मिश्र ||
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