Bhawani Prasad Mishra

(29 March 1913 – 20 February 1985 / India)

बहुत नहीं सिर्फ़ चार कौए थे काले - Poem by Bhawani Prasad Mishra

बहुत नहीं सिर्फ़ चार कौए थे काले,
उन्होंने यह तय किया कि सारे उड़ने वाले
उनके ढंग से उड़े,, रुकें, खायें और गायें
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Comments about बहुत नहीं सिर्फ़ चार कौए थे काले by Bhawani Prasad Mishra

  • Sawan Dhyani (7/4/2012 4:40:00 AM)

    Kavita acchi hai kaafi. (Report)Reply

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