Yaas Yagana Changezi

(1883 /1884 - 02 February 1956 / Azeemabad, Patna / British India)

इल्म क्या इल्म की हकीक़त क्या - Poem by Yaas Yagana Changezi

किसकी आवाज़ कान में आई
दूर की बात ध्यान में आयी

आप आते रहे बुलाते रहे
आने वाली एक आन में आयी

यह किनारा चला कि नाव चली
कहिये क्या बात ध्यान में आयी!

इल्म क्या इल्म की हकीक़त क्या
जैसी जिसके गुमान में आयी

आँख नीचे हुई अरे यह क्या
यूं गरज़ दरम्यान में आयी

मैं पयम्बर नहीं यगाना सही
इस से क्या कसर शान में आयी


Comments about इल्म क्या इल्म की हकीक़त क्या by Yaas Yagana Changezi

There is no comment submitted by members..



Read this poem in other languages

This poem has not been translated into any other language yet.

I would like to translate this poem »

word flags

What do you think this poem is about?



Poem Submitted: Tuesday, April 17, 2012

Poem Edited: Tuesday, April 17, 2012


[Report Error]