Praveen Pandey


बिखरे शब्द

<इस कविता में मैंने वृद्धा आश्रम में रह रहे लोगो को विभिन्न शब्दों के रूप में स्थापित किया हैं
और कोशिश की हैं उस पल को आपसे मिलाने की, सुक्रिया।>

'बिखरे शब्द '
अनेकों बार दिखते थे
आते जाते लडखडाये दरवाजे से
कमरे में पड़े वो बिखरे शब्दों के मंजर
खंडहर सी हो चली थी
कुछ टूटे, कुछ फूटे पर गहरइयो में डूबे

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