Satyam Kumar Tiwari


ज़िन्दगी

बहती हुई नदी में देखा मैने एक नाव
थोड़ा टूटा, थोड़ा फूटा, शायद खुद से रूठा
चलता चला जा रहा था

देखकर उसे मुझे हुआ थोड़ा अचंभा
की आखिर उसे चला कौन रहा था

आगे जाकर देखने की कोशिश की
पर देख न पाया

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