SURABHI JHA

Rookie (23/08/1991)

झरोखे

यूँ ही यारों के संग मिल बैठ जब बचपन की बातें होती,
आखोँ के सीपी में जगमगा उठते हैं मीठे यादों के मोती

बीच दुपहरी नंगे पाँव भागना तितलियों के पीछे,
और थक हार कर बैठ जाना आँगन के उन पेड़ों के नीचे

लोरियों की गरमाहट में लिपटी होती थी हमारी हर रात,

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