Sushil Kumar

Rookie (10: 05: 1951 / Bulandshahr)

Best Poem of Sushil Kumar

गुरु बंदना

गुरुवर तुम्ही बता दो किसकी शरण में जायें।
चरणों में जिसके गिरकर अपनी व्यथा सुनाएं।

अज्ञान के तिमिर ने चारों तरफ से घेरा।
क्या रात है प्रलय की होगा नहीं सबेरा।
होगा नहीं सबेरा...........
अनजान सी डगर पे कैसे कदम बढाएं।
गुरुवर तुम्ही बतादो...............

छल, दंभ, द्वेष, ईर्ष्या, साथी हैं सब हमारे।
वो कदम-कदम पे जीते हम हर कदम हारे।
हम हर कदम पे हारे.........
दिखला दो राह ऐसी पीछे ये छूट जाएँ।
गुरुवर तुम्ही बता दो........

अन्याय और हिंसा, बैसाखियाँ हमारी।
जिनके सहारे चलकर हमने उमर गुजारी।
हमने उमर गुजारी.......
पैरों को दो वो शक्ती ...

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बापू के प्रति

उतरे अमावस रात्रि में, हे पूर्णिमा के चन्द्रमा।
तुम थे अखण्डित-राष्ट्र की पावन सुगन्धित आत्मा।
तुमने जगायी चेतना, फूंके मृतो में प्राण भी।
होगये तनकर खडे, जीवित तो क्या निष्प्राण भी।
तुमने अहिन्सा, सत्य के दो अस्त्र भारत को दिये।
कातकर चरखा स्वदेशी वस्त्र भारत को दिये।
तुम थे धरोहर राष्ट्र की, होगये समर्पित, राष्ट्र को।
हे राम! कहकर कर दिये निज प्राण अर्पित राष्ट्र को।
हे सत्य के पर्याय, हे नर-श्रेष्ठ, हे भारत-सुमन!

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