Sushil Swamy


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Best Poem of Sushil Swamy

मुम्बई

हमे गर्व है..
हमने थमना नही सीखा है,
भले ही लांघ ले खुन के छिटें
सड्कों पे गिरे अजनबी लशें
हमने सहमना नही सीखा है।
हमे गर्व है..
हमने थमना नही सीखा है,

अर्थ की महता..
छीन सी गयी है हमारी
संवेदनात्मक क्षमता
हमने व्यस्क नही व्यस्त होना सीख है.
हमे गर्व है..
हमने थमना नही सीखा है,
भले ही लांघ ले खुन के छिटें
सड्कों पे गिरे अजनबी लशें
हमने सहमना नही सीखा है।

करेंगें थोडी चिंता
थोडा तर्क
हमें क्या फ़र्क
हमने बस सान्तव्ना कि मोम्बत्ती जलना सीखा है

हमे गर्व है..
हमने थमना नही सीखा है,
भले ही लांघ ले खुन के ...

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