vishwas kumar


कलम जब भी उठाता हूँ

कलम जब भी उठाता हूं, दुश्मन के छक्के छुड़ाता हूं नहीं मुझे कल की फिकर है, मैं सिर्फ आज और आज का ही दीदार कराता हूं कलम जब भी उठाता हूं, दुश्मन के छक्के छुड़ाता हूं| दुश्मन को न करेंगे माफ, और करेंगे और कर के ही रहेंगे भ्रष्टाचार साफ दुश्मन ऐसे ही कराता रहेगा हमें हमारी मूर्खतापन का अहसास अब तो जागो मेरे नेताओं तुम आज, तुम ही कर सकते हो भ्रष्टाचा

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