Yash Kataria

Rookie - 58 Points [Yashk] (Pind Wazirpur)

Jee Raha Hoon

अकेला अकेला दुःख के फट सी रहा हूँ
गिरता-उठता हाँ, मैं जी रहा हूँ।

विरह के गम को पी रहा हूँ,
रोता-सोता कैसे करके बस जी रहा हूँ।

एक-कदम-अगले उम्मीदों का भर सह रहा हूँ,
इस चालकदमी उठा-बैठ में मैं जी रहा हूँ।

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