Shashikant Nishant Sharma

Rookie (03 September,1988 / Sonepur, Saran, Bihar, India)

रोटी का टुकड़ा - Poem by Shashikant Nishant Sharma

हर रोज की तरह
सुबह-सुबह
मै छत पर टहल रहा था
तभी मैने देखा
थोड़ी ही दूर
एक मकान में एक महिला
झाड़ू पोछा लगा रही थी
खुले दरवाजे और खिड़कियों से
सब साफ-साफ दिख रहा था
ज्यादा उम्र की नही थी
पर हालात ने उसे
अधेड़ उम्र की दिखने पर कर दिया था मजबूर
काम पूरा होते ही
आई उसकी मालकिन
और पारिच्रमिक के रूप मे
थमा दी हाथ में
रोटी के दो चार टुकड़ें
उस टुकड़े को वह
ढक ली अपनी आँचल में
और चल दी अपने घर
कुछ ही दूर था उसका घर
मैने देखा
उसके दो छोटे-छोटे बच्चें
देखते ही माँ को उछले
मै देखता रह गया
उस घर का दुखड़ा
उस माँ का मुखड़ा
और वह रोटी का टुकड़ा
शशिकांत निशांत शर्मा 'साहिल'


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Poem Submitted: Saturday, March 30, 2013



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