Nida Fazli

(12 October 1938 / Dehli / India)

बदला न अपने आप को जो थे वही रहे - Poem by Nida Fazli

बदला न अपने आप को जो थे वही रहे
मिलते रहे सभी से मगर अजनबी रहे

दुनिया न जीत पाओ तो हारो न ख़ुद को तुम
थोड़ी बहुत तो ज़हन में नाराज़गी रहे

अपनी तरह सभी को किसी की तलाश थी
हम जिसके भी क़रीब रहे दूर ही रहे

गुज़रो जो बाग़ से तो दुआ माँगते चलो
जिसमें खिले हैं फूल वो डाली हरी रहे


Comments about बदला न अपने आप को जो थे वही रहे by Nida Fazli

There is no comment submitted by members..



Read this poem in other languages

This poem has not been translated into any other language yet.

I would like to translate this poem »

word flags

What do you think this poem is about?



Poem Submitted: Wednesday, April 11, 2012

Poem Edited: Wednesday, April 11, 2012


[Hata Bildir]