Narayan Bharasa Meher

(31 October 1921 - 17 October 2000 / Sinapali, Nuapada, Orissa / India)

पुरीर रथय़ातरा (ओड़िआ गीत) - Poem by Narayan Bharasa Meher

मन ! देखि य़ा रे, पुरीर रथय़ातरा ।
जगन्नाथङ्कर गुण्डिचा बिजय
दिशुअछि केड़े तोरा ॥
रे मन … (०)
*
नीळाचळनाथ प्रभु जगन्नाथ
य़हिँ कैबल्य पसरा ।
कोटि नरनारी रहिछन्ति पूरि
दर्शन दुःख- पाशोरा ॥
रे मन … (१)
*
ताळध्वज रथे बिजे बळराम
नन्दिघोषे गिरिधरा ।
दर्पदळनरे भगिनी सुभद्रा
तिनि मूर्त्ति चित्त-हरा ॥
रे मन … (२)
*
प्रभुङ्क महिमा कि देबा उपमा
से जगतनाथ परा ।
राजा इन्द्रद्युम्न करिले स्थापन
य़श गा‍उछि ए धरा ॥
रे मन … (३)
*
हरिङ्क प्रसाद खण्डे परमाद
आनन्द बजारे भरा ।
भुञ्जुछन्ति भक्ते आनन्दित होइ
भुलि निज दुःख सारा ॥
रे मन… (४)
*
जगन्नाथङ्कर उत्सब अपार
देखुअछि परम्परा ।
ध्याये नारायण भरसा से प्रभु
हरिबे कषण भारा ॥
रे मन … (५)

* * *
[एहि गीतटि कविङ्क “नारायण-भजनावळी” रु गृहीत ]


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Poem Submitted: Saturday, September 15, 2012

Poem Edited: Saturday, September 15, 2012


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