Shashikant Nishant Sharma

Rookie - 133 Points (03 September,1988 / Sonepur, Saran, Bihar, India)

Shashikant Nishant Sharma Poems

441. समुन्दर के किनारे किनारे 3/7/2013
442. सूर्य और दिया 3/30/2013
443. सरस्वती वंदना 3/21/2013
444. स्वाभिमान पे लगा घाव 10/12/2012
445. साक्षरता दिवस और पंडित जवाहर नेहरु 10/12/2012
446. साक्षरता दिवस और मलिन बस्ती के बच्चें 10/12/2012
447. साथ में दरिया साहिल होगा 3/7/2013
448. साथ में दरिया साहिल होगा 2/20/2013
449. साहिल के बाँहों में 2/20/2013
450. साहिल के बाँहों में 3/7/2013
451. है मेरी बस एक चाह 3/7/2013
452. है मेरी बस एक चाह 2/20/2013
453. है मशाल ज्योति का प्रतिक 6/29/2012
454. है ये गरीबी के दास 7/9/2012
455. हैं साहिल की फरयाद 3/7/2013
456. हम तो इंतजार करते रहें 3/21/2013
457. हम थे बन्दर हम है बन्दर 2/28/2013
458. हम थे बन्दर हम है बन्दर 12/24/2012
459. हम थे बन्दर हम है बन्दर 1/29/2013
460. हरे पत्तें पीले पत्ते 3/21/2013
461. हर शाम जो मेरे ख्वाबों में आती है सताती है 4/16/2012
462. हस लो आज 3/30/2013
463. हंसो हंसो खूब हंसों 3/30/2013
464. हाथों का सहारा देना 3/21/2013
465. हिंदी दिवस (१४ सितम्बर) 3/7/2013
466. हिंदी दिवस (१४ सितम्बर) 2/25/2013
467. हिन्दी दिवस के सुवसर पर 4/11/2013
468. हिन्दोस्तान 1/30/2013
469. हिन्दोस्तान 3/7/2013
Best Poem of Shashikant Nishant Sharma

A Short Love Story

Started with meetings and greetings
Talked a lot in few sublime seatings
When I asked her name
She told very soon
My name is moon
I asked what do you want and why
She told me with a shy, sky
My dream is to fly so high
When I asked when you will meet next
She remained silent and later text
During the dawn of Doomsday
I thought and pondered all day
She had told with eyes filled of tear
I asked from what you fear my dear
She expressed the consequences of love
I thought she must have experienced love
Wanted to know who hurt her feeling
The last ...

Read the full of A Short Love Story

तेरी पलकें झुकीं झुकीं

तेरी पलकें झुकी झुकी जो उठती है
कोई जादू सा असर हमपे करती है
क्या बताएं तू कैसी लगती है
जान तू जानशीन लगती है
तेरी बातों में न जाने कैसा जादू है
मेरी दिल को तेरी ही आरजू है
तेरी तिरछी झुकी नजरों का समां है
तेरी मदभरी ओठें जाम छलकती है
कोई जादू सा...

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