VIKRANT JOSHI

Rookie [Vikrant Joshi]

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तेरा शाम को टहलना याद है

तेरा शाम को टहलना याद है,
तुझे देख‌ दिल का बहलना याद है,
यूं तो फुंक-फुंक कर कदम रखाते थे हम,
पर तेरी चाल पर दिल का फिसलना याद है,

तू भी कम नहीं थी उन दिनों,
कत्ल करने निकलती थी सड़कों पर,
यूं तो चाहने वाले तो बहुत थे तेरे,
पर मेरे लिये तेरे दिल का मचलना याद है,
तेरा शाम को टहलना याद है|

सुना था पत्थर दिल है तू,
कद्र नहीं किसी कि तुझे,
पर दर्द कभी हो मुझे तो,
तेरा मोम कि तरह पिघलना याद है,
तेरा शाम को टहलना याद है|

अजीब ख्याल थे तेरे प्यार के लिये,
गिरा हुआ समझती थी तू इसे,
पर क्या कमाल था मेरे इश्क का,
तेरा गिर कर ...

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