Shashikant Nishant Sharma

Rookie (03 September,1988 / Sonepur, Saran, Bihar, India)

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वे अर्धनंग है अश्लील है
तो आप ही अलील बना कीजिए
इसे सभ्यता का पतन नही
युग परिवर्तन कहा कीजिए
समय अब देर नही
हम नंगे होकर नाचेंगे
वस्ञ का अभाव
सभ्यता का प्रभाव
सब दुर हो जाएया
एक बार फिर हम
आदि मानव बन जाएगें
फिल्मो में हो रहा है
खुले आम होने दीजिए
आँख बंद करके सुनते रहिए
और कान बंद करके देकते रहिए
वे नही करते है
तो आप ही किया कीजिए
एक बार सबको
आदि मानव बन जाने दीजिए
यह पश्चिमी सभ्यता
की नही
भारतीय दर्शन का देन है
समय परिवर्तन शील है
इसे बदल जाने दीजिए
अब आप शशिकान्त को
विदा कीजिए
प्रणाम, सलाम, गुडवाई
शशिकांत निशांत शर्मा 'साहिल'


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Poem Submitted: Thursday, April 11, 2013

Poem Edited: Tuesday, October 8, 2013


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