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(03 September,1988 / Sonepur, Saran, Bihar, India)

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एक किताब

है जिनदगी एक किताब
यह जान लिजीयें जनाब
जिनदगी हमें जीना है
हर दिन एक पन्ना है
हर रोज़ कुछ लिखता है
कुच सिखता है
जो कुछ नही करता
समय यू ही गँवाता
रह जाता उसका हर पन्ना सादा
मिलता नही किसी को कम या ज्यादा
जो समय को न पहचानता
जिंनदगी किताब नही रद्दी बनजाता
हर प्रश्न का दीजिए जवाब
हर काम का कीजिेए हिसाब
वर्ना बेकार हो जायेगी यह जिन्दगी का किताब
यह जिन्दगी का किताब
जो हुआ है हमे नसीब
न कीजिएगा इसका उपयोग अब
तो जाइएगा गरीब
यह जान लीजिए सभी
समय नही बीता है अभी
अगर नही कीजिएगा इसका भी
तो नही आएगा यह समय कभी
यू ही जीते-जीते
जिन्दगी बीत जाएगी
यू ही सिसकाते -सिसकाते
किताब छीज जाएगी
नही बचेगा कुछ
मिट जाएगा सब कुछ
कीजिेए कुछ काम अन्मोल
बढ़ जाएगा इसका मोल
और इस जिन्दगी के किताब
बढ़ जाएगा किमत
सब पहचानेगे अपनी ज़रूरत
वर्ना यू ही घीलते-घीसते
समय की रेत पर चलते-चलते
न रहेगा कोई नामो निशान
न कोई पहचान
इसलिए हर रोज पढ़िए
ढिक से समय के जिन्दगी का किताब
इसी तरह न छोडि़ए
वर्ना हवा की झोके हर रोज
उड़ती जाएगी किताब का पन्ना
और एक दिन यू ही
सारे पन्ने पलट जाएगें
दोबारो पड़ने का मौका
किसी को नही मिलता
कहते है यमराज के का का
फट जाएगी जिन्दगी का किताब
क्या आप नही समझें जनाब
शशिकांत निशांत शर्मा 'साहिल'

Submitted: Saturday, March 30, 2013


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