Shashikant Nishant Sharma

Rookie (03 September,1988 / Sonepur, Saran, Bihar, India)

मेरा गाँव शहर से अच्छा - Poem by Shashikant Nishant Sharma

शहर से उबरा हुआा मन
थका हुआ अपना तन
लेकर आया अपने गाँव में
मिट गया पल भर मे थकान
गाँव के पीपल की छाव में
रम गया मेरा मन
कलियों की मुस्कान में
औरो की गुंजन में
खिल गया दिल की कली
जब देका चारो ओर हरियाली
गेहू की पली-पकी बाली
आनंदित हुआ मेरा तन-मन
देख कर पीले-पीले सरसो
झूम रही थी हो कर मस्त मगन
मानो हो नल विवाहित दुलहन
इन्तजार किया वर्षो
और आज उसका साजन
आ गया है करने मिलन
नही है शहर की गलियों मे
वह ताजगी वह रौनक
जो है गाँव की गलियों में
नही शहर की सड़क
की तरह विरान सुनसान
गाँव की वह सड़क
जिससे कोई नही है अन्जान
सुन कर पैर की आहट
पथिक को लेता पहचान
मेरा गाँव मुझे लगता गुलशन
और यव शहर रमशान
है यव मेरा अहसास
कि तास्किता के आस-पास
भटकता मेरा भ्रम
तु बतला दे कम से कम
गाँव मे खुशी है या शहर में गम
शशिकांत निशांत शर्मा 'साहिल'


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Poem Submitted: Saturday, March 30, 2013



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