Shashikant Nishant Sharma

Rookie (03 September,1988 / Sonepur, Saran, Bihar, India)

जागो नव जवानों - Poem by Shashikant Nishant Sharma

भारत के मिटटी मे बाते सुगंध
सगरो कइलल बाते गंध
इकर भविष्य बाते उज्जवल
कहेलन सबसे साहिल
भारत के भाग्य बा बुलंद
मन के कररे ल तू आनंद
झगड़ा झंझट के बंद
भारत रहे विश्व के गुरू
किर बनी विश्व-गुरू
आज नाहि अभिए से
जेतन बाते ओतन से
कर द काम तु शुरू
काम के मतलब काम ना समझिह
काम के मतलब मेहनत बुझिह
बचे आपन आबरू
दोसरो के नाढ लुतिह इज्जत
जेतन हो सके करअ
गरीब लाचार के तु हिफजत
मरे ला बा त मरअ
दोसरो खातिर तु मरअ
भारत माइ के हम पु़ञ
केहु कपुत ना सपुत
सभनी एक इसन बारअ
केहु उच नाही नीच
इ खाई काइसन हमनी के बीच
बतलाव हमरी भाई
इ खाई कब भराई
खाके कहअ माटी के सौगंध
जब तक फूल मे रही सुगंध
जह तक चाँद चारा चमकी
सुरज सुबह शाम दमकी
प्यार के इ न धार मुरकी
रहम बनके भाई-भाई
ना करम झगड़ा लड़ाई
बढ़अ बड़अ आगे बड़अ
हझहु तोहरा साथे वानी
इ साहिल के ह वानी
ऐ पर ना करअ आना कानी
चलअ मिलके लिखी विकास के कहानी
मिला द सब बैर पुरानी
नया-नया समय बा आइल
इकरा ना अइसे गवाईअ
आव चलअ लिखी प्रेम के संगीत
गीत नया बा रीत नया बा
गावअ देश के जवान
सर कटाव देश के खातिर
रहे देश के आन-वान-शान
आत्म सम्मान रखअ अपना भीतर
उढअ जागअ देस के नौजवान
तोहरा बिन बा देस विरान
कैलअ बा भ्रष्टाचार
हो रहअ बा गुण्डागर्दी के व्यापार
आव आगे बड़अ
तब ही होई सुधार
नौ जागरण के प्रसार
साझी बा संसार के इतिहास
ना होखेला एका एक विकास
लेकिन का होत बा विकास
एकरो बा तोहरा अभास
चलअ मिलके करी प्रयास
हो जाए एक बार फिर क्रांति
बदल जाए सरकार बदल जाए नीति
हो देश की उन्नति
सब प्रदेश मे शांति
लिखके भेंजअ अपन मती
हमार तो बा सहमती
शशिकांत निशांत शर्मा 'साहिल'


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Poem Submitted: Saturday, March 30, 2013



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