Shashikant Nishant Sharma

Rookie (03 September,1988 / Sonepur, Saran, Bihar, India)

रझा बंधन - Poem by Shashikant Nishant Sharma

भाई-बहन का पर्व पावन
है यह रजा बंधन
भाई-बहन का अटूट है रिस्ता
यह है खुनका रिस्ता
मन से मन का प्रीत है
कितना अच्छा जग का रीत है
बहन है कितनी प्यारी-प्यारी
बन जाए छतरी
भाई को ना लगने दे धुप
ढिक ही कहा है किसी ने
बहन है माँ का दुसरा रूप
जानता है जग संसार
कितना पावन है भाई बहन का प्यार
बाँधो आज हाथ पर राखी
मेरी प्यारी-प्यारी बहन
कौन जाने कितना है मन का खुशी
फिर दुहराता हूँ वचन
गँवा कर अपना प्राण भी
करूगा तेरी रझा
तुमने बाँधी हाथ पर राखी
हमना सर बाँधा कफन
जब तक है तन मे प्राण
नही नजर उढा सकता कोई शैतान
धु जकता अहरू
भाई बहन का पर्व पावन
है यह रझा बंधन
शशिकांत निशांत शर्मा 'साहिल'


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Poem Submitted: Saturday, March 30, 2013



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