(03 September,1988 / Sonepur, Saran, Bihar, India)

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मद मस्त होली

ठण्ड को करने विदा
आया मौसम फागुन का
लिए साथ में मस्ती उमंग
और होली का रंग
हरे, गुलाबी, नीले, पीले
लाल बैगनी और काले
रंगों में है रंग अनेक
सब रंगों में रंग जायेंगे
न रहेगा कोई भेद
मिट जायेगा सब भेद
न रहेगा कोई छोटा बड़ा
न मैं जीता न तू हारा
बाद जायेगा भाईचारा
बढेगी अपनी यारी, यारा
होली का- रंग न्यारा
आया अब होली
पर्व ये रंगों वाली
बना बच्चों की टोली
होली का हुर्दंग मचा
सब हो गए मतवाला
होली है अगले सप्ताह
पर कम नहीं है उत्साह
पहले से ही शुरू हो जाते
बच्चे दुकान से रंग लाते
नजर आता जो कोई रिश्तेदार
होता उसका कुरता रंगदार
नया नया हो हित कुटुम
स्वागत न होता कुछ कम
जाते जाते उनको पहले
रंग देते है रंगने वाले
छिपके रंग फेक देते है
या छत से दाल देते है
शुरू होता है बच्चों से
बुढ़ें भी रंग जाते है
ज्यों ज्यों होली नजदीक आता है
होली का रंग और बाद जाता
रंगों से शुरू
पर रंग में जब भंग मिलता
तब कदों किचर भी चलता
और होता होली का हुरदंग
डालते एक दुसरे पे रंग
खा-पी कर भंग
लेते मजा मस्ती का यार
यह नशा होली का है कुछ यूँ
सब भूल जातें है मन मुटाव
खाते है विभिन्न प्रकार के पकवान
शाम को सजधज के
लिए हाथ में गुलाल
मिलके एक दुसरे के गले
खूब मानते है खुशियाँ
प्यार के रंग में सब रंग जाते है
दुसमन भी गले मिल जाते है
शशिकांत निशांत शर्मा 'साहिल'

Submitted: Friday, July 13, 2012
Edited: Saturday, July 14, 2012


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