Madhuraj Kumar

Rookie - 28 Points (13 March 1997 / Bagaha, Bihar)

कौन हो तुम - Poem by Madhuraj Kumar

कल्पना हो तुम मेरी

या महत्वाकांक्षा हो कोई
हृदय के पृष्ठों में खोई
कोई धूमिल परछाईं हो

या प्रातः काल के उगते सूरज
की बेसुध अरुणाई हो

दिल हो तुम किसी शायर का
या मोती अथाह सागर का

बादल इस नील गगन का
कोई पुष्प हो प्रेम चमन का

तारा कोई अन्धनिशा का
पथ हो किसी अनंत दिशा का

हो तुम कौन ओ मतवाली
जिसे मै न जान सका हूँ
क्या कविता हो किसी नन्हें कवि की
यह भी न मान सका हूँ

फिर क्यों यूँ तुम हरपल मुझमें
भर जाने को आ जाती हो
मेरी आँखों में, साँसों में
धड़कन में समा जाती हो...


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Poem Submitted: Thursday, July 3, 2014

Poem Edited: Thursday, July 3, 2014


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