Members Who Read Most Number Of Poems

Live Scores

Click here to see the rest of the list

(15 June 1955 / Jarwal / India)

What do you think this poem is about?

For Example: love, art, fashion, friendship and etc.

ज़ुल्मते शब्

पता नहीं है उजालो को वुसअते शब् का,
तहे चिराग भी क़ब्ज़ा है ज़ुल्मते शब् का ।

गुलो मे सर को छुपाये सिसक रही है हवा,
सहर के हाथ मे दमन है रुखसते शब् का ।

ये कहकशां है ग़ुबारे सफ़र का आईना ,
ये चाँद नक्श-ऐ-कफे पा है हिजरते शब् का ।

बता रहें हैं किसी के खुले हुए घेंसू ,
हवा की ज़द पे खज़ाना है नकहते शब् का ।

ठहर के ओंस की बूंदे शजर के पत्तो पर ,
इलाज ढूँढ रही हैं हरारते शब् का ।

थका थका सा उजाला डरी डरी आँखें ,
बहुत अजीब है मंज़र तिलावते शब् का ।

वो एक अश्क जो "काज़िम" है ता सहर बाक़ी,
वही चराग़ मुजाविर है तुर्बते शब् का ।।

Submitted: Tuesday, April 10, 2012


Read this poem in other languages

This poem has not been translated into any other language yet.

I would like to translate this poem »

word flags

What do you think this poem is about?

Comments about this poem (Lafze Moutbar by Kazim Jarwali )

Enter the verification code :

There is no comment submitted by members..
[Hata Bildir]