Brajendra Nath Mishra


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Best Poem of Brajendra Nath Mishra

Chhaon Ke Sukh Bhog Pathik

छाँव के सुख भोग पथिक,
गर धूप के छाले सहे हैं.

सूर्य तो जलता रहा है
विश्व को देकर उजाला,
अग्नि की चिंगारियां भी
दे सकेगी तभी ज्वाला,

जब हवा के रुख को तुम
मोड़ रे अब मोर पथिक.

नींद के सुख भोग पथिक
गर जागरण झोंके सहे हैं.
छाँव के सुख भोग पथिक
गर धूप के छाले सहे हैं.

दुखों के इस तिमिर घन में,
तड़ित प्रभा से राह खोजो,
खे सकोगे इस पार से
उस पार नाविक नाव को,

गर त्वरित इस धार को,
तुम मोर रे अब मोर पथिक,
जिंदगी का गान सुन
गर गर्जना के स्वर सुने हैं.
छाँव के सुख भोग पथिक
गर धूप के छाले सहे हैं।

भूल ...

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