Brajendra Nath Mishra


महकाएँगे जग को देकर नव सन्देश. - Poem by Brajendra Nath Mishra

महकाएँगे जग को देकर नव सन्देश.

हम बच्चे हैं फूल उपवन मेरा देश,
हम महकाएँगे जग को देकर नव सन्देश.

भेदभाव सब मिट जायेंगें,
आपस में हिलमिल गायेंगे.
एक हमारा नारा है,
सारा विश्व हमारा है.

एक सांस है एक हृदय है, भिन्न - भिन्न हैं वेश,
हम महकाएंगें जग को देकर नव सन्देश.

झगड़े आपस में निपटाएं,
प्रेम - लता के बीज उगाएं,
दुश्मन को भी दोस्त बनाएँ,
सारे जग को बंधू बताएं.

होगा हरदम स्नेह से मेरे ममता का उन्मेष,
हम महकाएंगें जग को देकर नव सन्देश.

उदास कहीं न हो बचपन,
किसी गली में न हो क्रंदन,
बहनें कहीं न अपमानित हों,
आशाओं को न लगे ग्रहण.

भारत में फिर स्थापित हो माओं का सम्मान विशेष.
हम महकाएंगें जग को देकर नव सन्देश.

बुद्धा ने जग को मार्ग दिखाया,
गांधी ने विश्वास जगाया,
हिंशा का छोडो अवलम्बन,
सत्य प्रेम के ढृढ कर बंधन.

अब न धरा पर रह पायेगा दुःख, द्वेष और क्लेश.
हम महकाएंगें जग को देकर नव सन्देश.

आज मचा जो हाहाकार,
नहीं दुःख का पारावार,
जग बंधू का नाता जोड़ो,
शांति - धार के रास्ते मोड़ो.

प्रेम और बँधुत्व ही हो अब जीवन का उद्देश्य.
हम महकाएंगें जग को देकर नव सन्देश.


Poet's Notes about The Poem

This poem written in Hindi, whose English translation is also being published in another post, is dedicated to the brave children who have been awarded on the eve of Republic day i.e.26th January in India since its Independence. This is also in the memory of remembering the bravery of other children who have been awarded for their bravery by other state governments and also those children who have been awarded in other parts of the world. It also a tribute to those brave children who are brave but their bravery has not been projected or given due coverage in the media. They are the unsung heroes not garlanded by the public but they are also our heroes. 'Kalam aaj unki bhi jay bol' (let those unsung heroes also be hailed) .

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Poem Submitted: Tuesday, January 21, 2014

Poem Edited: Tuesday, January 21, 2014


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