Shashikant Nishant Sharma

Rookie (03 September,1988 / Sonepur, Saran, Bihar, India)

बस इतना है अपना सपना - Poem by Shashikant Nishant Sharma

है मेरा एक सपना
जाने सारा जमाना
महफ़िलों में गुन्जें तराना
पड़ें लोग मेरी रचना
रहूँ दिलवालों की बस्ती में
जिऊ जिंदगी मस्ती में
मिले किस्ती सहिल से
सब लोग चाहे दिल से
सदा जीवन और उच्च विचार
का करूँ मई सदा प्रचार
बेसहारों का बनू सहारा
सबके दिल में हो भाईचारा
सबके लिए मैं अपना
मेरे लिए सब अपना
बस इतना है अपना सपना
शशिकांत निशांत शर्मा 'साहिल' -


Poet's Notes about The Poem

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Poem Submitted: Thursday, February 28, 2013

Poem Edited: Friday, March 1, 2013


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