ग़ज़ल Poem by Love Joshi

ग़ज़ल

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जैसा तुमने चाहा बिल्कुल वैसा है
ये ना पूछो हाल हमारा कैसा है

पढ़ना है तो पढ़ लो हर इक पन्ने को
मेरा जीवन खुली क़िताबों जैसा है

जोड़ सको तो आकर जोड़ो टूटा दिल
रिश्तों को जो तोड़ रहा वो पैसा है

छोड़ सको तो छोड़ो सारी नफरत को
करनी का फल फिर जैसे को तैसा है

मिट्टी को सोना कर दे जो पल भर में
लव का क़िरदार हमेशा ऐसा है

- कवि लव जोशी

ग़ज़ल
Monday, October 5, 2020
Topic(s) of this poem: love and life
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