Vivek Tiwari

Rookie - 98 Points (23 July 1985 / Gaura (R.S.) Pratapgarh)

आया होली का त्यौहार - Poem by Vivek Tiwari

आया होली का त्योहार
लेके खुशियां प्यार अपार
फेंके एक दूजे पे गुलाल
मिला के हरे गुलाबी लाल.

हो भर के लाल रंग में प्यार
खुशियों कि फेंको बौछार
डालो पीले का आनंद
भरके पिचकारी में उमंग

खेलो हरे रंग ली होली
उड़ाओ सुख समृद्द्घि की रोली
नीले में भर के विश्वास
उड़ाओ खुशिओं का एहसास
की आया होली का त्यौहार...

हो उड़ने दो बंधुत्व तरंग
फेंको भाव के भर-भर रंग
चढ़ जेन दो मीठी गोली
फिर भी खेलो जैम के होली
कर दो आसमाँ रंगीन
रूट है आयी गजब हसीन.
फेंको एक दूजे पे रंग
मिला के हरे गुलाबी लाल
कि आया होली का त्यौहार....

चलो होलिका दहन करे
ईष्र्या और द्वेष का दमन करें
जला दे सरे कटू विचार
मनाएं होली का त्यौहार.

नफ़रत की दे-दे आहुती
चलो लगाएं प्रेम विभूति
प्रेम के रंग में सब रंग डाले
नफ़रत का कटरा न पाले
कि आया होली का त्यौहार
लेके खुशियों प्यार आपार.
कि फेंके एक दूजे पे गुलाल
मिला के हरे गुलाबी लाल
कि आया होली का त्यौहार.....


Comments about आया होली का त्यौहार by Vivek Tiwari

There is no comment submitted by members..



Read this poem in other languages

This poem has not been translated into any other language yet.

I would like to translate this poem »

word flags

What do you think this poem is about?



Poem Submitted: Saturday, March 15, 2014

Poem Edited: Tuesday, March 18, 2014


[Hata Bildir]